SSG Jowar अन्न और पशु चारे की उत्तम फसल है। चारे की ज्वार भी दो प्रकार की होती हैं। एक काट चारा देने वाली तथा कई काट वाली तथा SSG (Sorghum Sudan Grass) वर्ग की होती है। ज्वार मक्का और बाजरा की अपेक्षा लम्बे समय तक हरा स्वादिष्ट चारा देने वाली खरीफ की फसल है।

भूमि :-

ज्वार की फसल लगभग सभी प्रकार की भूमियों में हो जाती है परन्तु चिकनी तथा चिकनी दोमट भूमि उत्तम है परन्तु पर्याप्त जल निकासी आवश्यक है।

भूमि की तैयारी :-

ज्वार के लिये भूमि को एक मिट्टी पलटने वाले हल से एक जुताई कर 2 जुताई डिस्क हैरो से करके पाटा लगा कर तैयार करें।

किस्म :-

 1. 

बीज की मात्रा :-

एक काट वाली ज्वार की किस्मों का 25-30 किलो तथा बहुकाट वाली किस्मों का 20-25 किलो बीज पर्याप्त होता है।

बिजाई का समय :-

अगेती बिजाई Multicut मार्च माह में तथा समय की बिजाई के लिये मध्य जून से मध्य जुलाई तक उत्तम समय है।

बीजोपचार :-

बीज बिजाई से तुरन्त पहले Emisan (PMA) 2.5 ग्राम प्रति किलो उपचारित कर बिजाई करें।

बिजाई का तरीका :-

ज्वार का बीज छिड़क कर न बोयें। केरा, पौरा या सीड ड्रिल से लाइन से दूरी 22-25 सें.मी. की रखें ताकि निराई-गुडाई सुगमता से हो जाए।

खाद एवं उर्वरक की मात्रा :-

उर्वरक या अन्य सुक्ष्म तत्वों की मात्रा Soil Health Card के आधार पर डालें। यदि भूमि का परिक्षण नहीं कराया हुआ तो 25 Kg Nitrogen अर्थात 44 किलो युरिया तथा 8 Kg P₂O, यानि 50 Kgs सिंगल सुपर फासफेट बीज बिजाई के साथ दें तथा 20 Kg नाइट्रोजन (44 Kg युरिया) एक महीने की फसल होने पर देनी चाहिए।

सिंचाई :-

मार्च / अप्रैल की बिजाई के लिये एक या दो तथा मानसून की बिजाई के लिये वर्षा के अनुसार सिंचाई करें। अधिक वर्षा होने पर तुरन्त अधिक पानी की निकासी करनी आवश्यक है।

कटाई :-

मल्टीकट ज्वार की कटाई 25-30 दिन बाद तथा एक कट वाली ज्वार 65-80 दिन में करें। वर्षा ऋतु की ज्वार पहली वर्षा के बाद करें क्योंकि ज्वार के पहले काट में HCN Hydrocynic Acid की मात्रा होती है जो पशुओं के लिए घातक होती है।

कीट नियन्त्रण :-

टिड्डा, भूरी वीवील, लीफ होप्पर एवं पायरीला 250 से 400 ml मैलाथियोन 50 EC 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ स्प्रे करें। ट्राइक्लोफोन, सेवीथियोन, मोनो क्रोटीफोस तथा मैलाथियोन धूडा न प्रयोग में लाएं। गोभ की सुन्डी 250 ml मैलाथियोन 50 EC या 100 ग्राम कार्बोरिल सेबिन 50 WP 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ छिड़कें ।

व्याधियाँ :-

लाल सडन :- Emisan से बीज उपचारित करके बीजें।

टिप्पणी :-

इस पत्रक में फसल उत्पादन की समग्र सिफारिशें कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि ज्ञान केन्द्रों, कृषि विज्ञान केन्द्रों के कृषि वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों तथा सरकार के कृषि विदों के अनुसन्धान एवं अनुभवों पर आधारित है। फसल / किस्म का उत्पादन मात्र बीज पर निर्भर नहीं करता बल्कि भूमि, खाद, उर्वरक तथा अन्य कारकों तथा वातावरण पर निर्भर करता है। भिन्न प्रदेशों / क्षेत्रों के कृषक स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों, कृषि विदों की सलाह और स्वयं के अनुभव का उपयोग कर उत्तम ही नहीं सर्वोत्तम उत्पादन ले सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *