Berseem
बरसीम (Trifolium alexandrium) फसल उत्पादन की
समग्र सिफारिशें
1. Berseem भूमि :-
बरसीम उत्पादन हेतु दोमट, रेतीली दोमट, काली मिट्टी जिसमें पानी की निकासी हो उपयुक्त है।
2. Berseem खेत की तैयारी-
प्रथम जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा 2-3 जुताई साधारण हल से कर खेत को समतल कर लें।
3. Berseem बुवाई का समय :-
बरसीम की बिजाई का उत्तम समय सितम्बर के अन्तिम सप्ताह से अक्टूबर के अन्तिम सप्ताह तक है। यद्यपि बरसीम की बिजाई अक्टूबर के अन्तिम सप्ताह तक की जा सकती है।
4. Berseem बीज की मात्रा :-
8-10 किलो संसाधित (Processed) एवं परिक्षित (Tested) कासनी, सफतल खरपतवार रहित बीज प्रति एकड पर्याप्त है।
5. Berseem किस्म :-
Kissan Hadu Gold, Kissan Star
6. Berseem बीज का टीकाकरण :-
बरसीम बीज का राईजोबियम ट्राइफोली कल्चर का टीका लगाना चाहिए क्योंकि इस बैक्टीरिया से उपज बढ़ती है। यह टीका कृषि विश्वविद्यालयों से उपलब्ध हो जायेगा। 10% गुड का आधा किलो घोल बना कर इसमें राइजोबियम कलचर की एक पैकिंग 8-10 किलो बीज में मिलाकर बीज को पक्के फर्श पर छाया में सुखा लें और शाम के समय बिजाई करा दें क्योंकि दिन की तेज गर्मी के कारण बैक्टीरिया प्रभावित हो सकते हैं।
7. Berseem बिजाई का तरीका :-
बीज को खेत में भरे परन्तु शान्त पानी में बखेर दें। यदि हवा चलती है तो बीज को खेत में छिड़क कर मिट्टी में मिला कर पानी दें। बरसीम बीज में कासनी (Chikory) तथा सफतल परशियन क्लोवर (T. resipunatum), सैजी (Indian Clover-Mililotus Indica) तथा अन्य खरपतवार न हो इसलिये टीकाकरण से पूर्व बीज को 2 प्रतिशत नमक के घोल में डालें और कासनी तथा अन्य खरपतवार के बीजों को निधार कर अलग कर फिर टीकाकरण करें। उपज लेने हेतु बरसीम (8 Kg) के साथ 750 ग्राम सरसों/राया, या 15 किलो जई मिला कर बोयें। बरसीम के साथ राई घास (Rye grass) 2-3 किलो मिला कर भी बिजाई करने से उत्तम तथा पौष्टिक चारा उत्पादन लिया जा सकता है।
BioChemorganics Seeds Berseem Crop Production
8. Berseem खाद एवं उर्वरक :-
10 Kgs नाइट्रोजन (22 Kg यूरिया) तथा 30 किलो ग्राम फोसफोरस (175 किलो ग्राम सिगल सुपर फोस्फेट प्रति एकड) तथा 6 टन गोबर की सड़ी खाद बुवाई करते समय दे। इसके उपरान्त प्रति कटाई 10 किलो नाइट्रोजन (22 Kg युरिया) का छिडकाव करते रहे।
9. Berseem सिंचाई :-
प्रथम सिंचाई हल्की भूमियों में 5 दिन बाद और दोमट भूमि में 10 दिन बाद अवश्य करें इसके बाद 10-15 दिन के काल खण्ड में नियमित सिंचाई करते रहे।
10. Berseem पौध संरक्षण :-
(A) व्याधिया :-
(i) बरसीम में ऐसी जगहों पर जहाँ बरसीम की फसल धान के बाद ली जाती है वहाँ मैग्नीज सुक्ष्म तत्त्व की अल्पता/कमी के कारण बरसीम की मध्य पत्ति भूरे या पीत रंग की दिखाई देती है अतः 0.5 प्रतिशत मैग्नीज सल्फेट (एक किलो मैग्नीज 200 लीटर पानी) मे दो बार छिड़काव करें।
(ii) तना गलन (Stem rot) (Selerotinia-Schelerotiorum) तने पर जड़ों की तरफ कपास जैसी रचना बनती है. बावस्टिन 400 ग्राम 200 लीटर पानी से छिडकाव करें।
(B) कीट नियन्त्रण :-हरी सुन्डी, (Heliolthis armigera) टिड्डा आदि से फसल बचाने के लिये 60 ml ट्रेसर, 48% Spinosad, 100 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड छिडकाव करें।
11. Berseem खरपतवार नियन्त्रण :-बरसीम में अमरबेल (Cuscuta reflexa) से बचाने के लिये Emazetha pyr के छिडकाव से या हाथ से उखाड़ कर नियन्त्रण करें।
12. Berseem कटाई :-प्रथम कटाई बोने के 50 दिन तथा कालान्तर में 40 दिवस के अन्तराल पर कटाई करें।
13. Berseem साइलेज पशुओं का अचार बनाना :-
साइलेज बनाने के लिए निकट के कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की सलाह पर साइलेज या पशुओं का अचार बनाना चाहिए क्योंकि कई बार साइलेज से चारे में जहरीला पदार्थ पनपने से पशु हानी हो जाती है।
टिप्पणी :-
इस विवरणिका में फसल उत्पादन की समग्र सिफारिशें कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि ज्ञान केन्द्रों, कृषि विज्ञान केन्द्रों के कृषि वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों तथा सरकार के कृषि विदों के अनुसन्धान एवं अनुभवों पर आधारित है। फसल / किस्म का उत्पादन मात्र बीज परं निर्भर नहीं करता बल्कि भूमि, खाद, उर्वरक तथा अन्य कारकों तथा वातावरण पर निर्भर करता है। भिन्न प्रदेशों / क्षेत्रों के कृषक स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों, कृषि विदों की सलाह और स्वयं के अनुभव का उपयोग कर उत्तम ही नहीं सर्वोत्तम उत्पादन ले सकते हैं।
