Paddy
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चावल भारतीय थाली का मुख्य भोजन है। इसमें शर्करा की अधिकता होती है। धान सुगम, पाच्य एवं लजीज भोजन है। बासमति सुगन्धित धान अधिक सुपाच्य एवं स्वादिष्ट होता है। बासमति धान में 2 एसिटिलिन 1- Pyrazoline 2- AP के कारण खुशबू होती है। उत्तम उत्पादन लेने के लिये निम्न सिफारिशें उपयोगी हैं:-
1. भूमि का चुनाव :-
धान की फसल के लिये चिकनी तथा चिकनी दोमट मिट्टी उत्तम होती है क्योंकि इसमें पानी को संग्रहित करने की क्षमता होती है। दोमट भूमि धान के लिये उत्तम है धान की फसल 5 से 9 pH मान तक की भूमि में उगाया जा सकता है।
2. भूमि की तैयारी :-
मई में खेत को भूमि पलटने वाले हल (Soil turning Plough) से कर के दो-तीन जुताई टिलर से ट्रैक्टर द्वारा करें। भूमि घास पात मुक्त हो आवश्यक खाद एवं उर्वरक की मात्रा जुताई के साथ खेत में मिला दें।
3. नरसरी की बिजाई :-
धान की बासमति, असुगंधित तथा संकर किस्मों की नरसरी 15 मई से 7 जुलाई तक उत्तम समय है। एक एकड़ धान की बिजाई के लिये 18 x 3 मीटर की 5 क्यारियाँ थोड़ी धरातल से उठा कर बनाएं। नरसरी में गैलरी नमक रसायन (Thiophanate Methyl 75 WP) बीज बीजने से पहले क्यारियों में मिला दें। इस दवाई का बीज से उपचार नहीं करना। इसके बाद “नरसरी” नामक जैव उत्पाद का नरसरी पर 2 बार स्प्रे करें।
4. खाद एवं उर्वरक :-
खेत तैयार करते समय 600 क्विंटल गोबर क खाद दें। गोबर की खाद न हो तो हरी खाद ढेंचा दें। इसके अलावा भूमि स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के अनुसार खाद/उर्वरक दें। यदि उपरोक्त न हो तो उर्वरक की अनुमोदित मात्रा 50 Kg नाइट्रोजन (130 Kg यूरिया), 24 Kg फोसफोरस (150 Kg सिंगिल सुपर फास्फेट) तथा 24 Kg पोटाश (40 Kg MOP एवं 10 Kg 21% Zinc) तथा बासमति किस्मों में 36 Kg नाइट्रोजन (60 Kg यूरिया), 12 Kg फोसफोरस (72 Kg सिंगिल सुपर फास्फेट) तथा 10 Kg Zinc 21% का प्रयोग करें। नाइट्रोजन की 1/3 भाग तथा फोसफोरस, पोटाश तथा Zinc की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय दें। धान में नाइट्रोजन को अमोनिया के रूप में ज्यादा मानती है। धान में 2/3 भाग यूरिया रोपाई के एक माह बाद तथा पुनः एक माह बाद डालें।
5. बीज की मात्रा :-
बासमति एवं संकर किस्मों के लिये 8 Kg/एकड़ एवं असुगन्धित / परमल किस्मों का 12 किलो बीज वापरे।
6. बीजोपचार :-
बीज को 10 Ltr पानी में एक किलो नमक डाल कर घोल बना लें और उसमें 2-3 Kg बीज डाल कर बारी-2 से हल्का बीज निथार लें। प्रोसेस टी.एल. और प्रमाणित बीज में यह आवश्यक नहीं। बिजाई से पूर्व धान बीज को 5 ग्राम एमिशान 1 ग्राम स्ट्रैपटोसाईक्लीन के 10 Kg घोल में डाल कर सुखा कर बिजाई करें।
7. किस्म का चुनाव :-
बासमति धान की किस्मों में मुख्य PB-1121 Pusa Sugandh 4 (2005). PB-6 (Pusa-1401) (2010), CSR-30 (2001), PB-1509 (2013), PB-1718 (2017), पंजाब बासमति 4 (2018), Punjab Basmati 5 (2018), PB-1692 (2020), PB-1847 (1509), PB-1885 (PB-1121) ( ), PB-1886 (PB-6)
परमल समूह :- PR-114 (1999), PR-111 (1984), PR-115 (2000), PR-126, PR-129, PR-130, PR-131, PR-132
8. रोपाई का तरीका :-
बिजाई से पूर्व खेत में पानी भर कर पडलर या रोटावेटर से कट्टू कर लें। पौध उखाड़ने से एक दिन पहले नरसरी में पानी भर देना चाहिए जिससे पौध उखाड़ते समय जड़ें न टूटे। पौध उखाड़ कर एक 20 लीटर पानी में 40 gm कैलेडो (Carbendazin) डाल कर घोल बना लें। 25-30 दिन की पौध उखाड़कर धोकर 10-15 मिनट इस घोल में रखें और तब दो-दो पौधे एक जगह बासमति किस्मों को 20 x 15 सें.मी. तथा नॉन-बासमति 15 x 15 सें.मी. की दूरी पर लगा दें। नरसरी लगाने के बाद पहली किस्त यूरिया की देने के साथ 100 एम.एल. टिलर एकस्ट्रा दें। इस प्रकार एक एकड़ धान में बासमति किस्मों में 1,33.000 पौधे (33 पौधे प्रति वर्ग मीटर) तथा परमल किस्मों में 1,73,000 पौधे यानि (44 पौधे प्रति वर्ग फुट) हो जाते हैं। हरियाणा सरकार धान की सीधी बिजाई (D.S.R. = Direct Seeding Rice) के लिये प्रोत्साहन राशि 4500/- रुपये प्रति एकड़ प्रदान कर रही है।
9. खरपतवार नियन्त्रण :-
धान खरपतवार नियन्त्रण हेतु निम्न रसायनों के साथ निम्नलिखित क्रिया जा सकती है :-
| क्र.स. | रसायन का नाम | लगाने की विधि |
|---|---|---|
| 1. | 12 Kg. ब्यूटाक्लोर (मेचेटी), डब्ल्यूपी मिलाकर | 60 किलोग्राम रेत में पौधे लगाने के 2–3 दिन बाद एक बार खेत में फैला दें। |
| 2. | थायोबेन कट स्टेट दानेदार 12 Kgs/Acre | – do – |
| 3. | पेंडामेथेलिन स्टाम्प 12 Kgs/Acre | – do – |
| 4. | नोमिनी गोल्ड | 120 ml / Acre S.C. 22–25 दिन बाद, नमी होने पर |
